डॉ. सुरेन्द्र सुथार (1975) एम.एससी. प्राणी विज्ञान (कीट विज्ञान विशेषज्ञता) 1999 में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसी विश्वविद्यालय से इन्होंने पीएच.डी. सन् 2002 में प्राप्त की। पीएच.डी. में वर्मीटेक्नोलाजी इनका शोध विषय रहा है। शोध कार्य के दौरान इन्हें प्रतिष्ठित पिवश्वविद्यालय शोध छात्रवृत्ति प्राप्त हुई तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा शोधवृत्ति भी प्रदान की गई। डॉ. सुथार थार महामरूस्थल में केंचुए की जैविक विविधता, वर्गीकी एवं पारिस्थितिकी पर पूर्ण विवरण प्रस्तुत करने वाले प्रथम भारतीय है। इनके द्वारा राजस्थान के शुष्क क्षेत्र के लिए वर्मीकम्पोस्टिंग पैकेज का निर्माण किया गया। वर्तमान में डॉ. सुथार प्राणी शास्त्र विभाग, महर्षि दयानन्द स्नातकोत्तर, महाविद्यालय, श्रीगंगानगर में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में इकोलाजी में अध्यापन कार्य सम्पादित किया है तथा अनेक एम.एस.सी. शोध प्रबन्ध का निर्देशन किया है। इनका शोध का मुख्य क्षेत्र अर्थवर्म इकोलाजी, वर्मीटेक्नोलाजी, इकोटाक्सिकोलाजी, पोल्युशन बायोलाजी, फ्रेशवाटर इकोलाजी रहा है। डॉ. सुथार द्वारा लगभग 35 शोध पत्र, वैज्ञानिक आलेख, शोध-पत्र सारांश राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की अनेक वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. सुथार अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक समितियों के सक्रिय सदस्य है।
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